QTEN POST 3

 

sanskrit lakare | संस्कृत लकार -संस्कृत ज्ञान |


sanskrit lakare | संस्कृत लकार -संस्कृत ज्ञान |A

  • संस्कृत में काल दश भागों में विभाजित है जिनको दश लकार कहा जाता है :--

***************
०१ ) लट् ---- ल् + अ + ट्
०२ ) लिट् ---- ल् + इ + ट् 
०३ ) लुट् ---- ल् + उ + ट् 
०४ ) लृट् ---- ल् + ऋ + ट्
०५ ) लेट् ---- ल् + ए + ट्
०६ ) लोट् ---- ल् + ओ + ट्
***************
०७ ) लङ् ---- ल् + अ + ङ्
०८ ) लिङ्---- ल् + इ + ङ् 
०९ ) लुङ्---- ल् + उ + ङ् 
१० ) लृङ्---- ल् + ऋ + ङ्

***************

  • इनको स्मरण करने की विधी ये है कि :-

***************

ल् में ( अ इ उ ऋ ए ओ ) क्रम से जोड़ दो । और पहले कर्मों में ( ट् ) जोड़ते जाओ ।

फिर बाद में ( ङ् ) जोड़ते जाओ जब तक कि दश लकार पूरे न हो जाएँ ।

***************

  • इन लकारों के काल ये हैं :-

***************

  • (१) लट् लकार
= वर्तमान काल । 
जैसे :- राम खेलता है - रामः क्रीडति ।

  • (२) लिट् लकार
= अनद्यतन परोक्ष भूतकाल । जो अपने साथ न घटित होकर किसी इतिहास का विषय हो । 
जैसे :-
राम ने रावण को मारा था - रामः रावणं जघान ।


  • (३) लुट् लकार
= अनद्यतन भविष्यत काल । जो आज का दिन छोड़ कर आगे होनो वाला हो । 
जैसे :-
राम परसों विद्यालय नहीं जायेगा - रामः परश्व: विद्यालयं न गन्ता |

  • (४) लृट् लकार 
= सामान्य भविष्य काल । जो आने वाले किसी भी समय में होने वाला हो । 
जैसे :- 
राम यह कार्य करेगा - रामः इदम् कार्यम् करिष्यति।

  • (५) लेट् लकार
यह लकार केवल वेद में प्रयोग होता है ईश्वर के लिए क्योंकि वह किसी काल में बंधा नहीं है ।

  • (६) लोट् लकार 
= ये लकार आज्ञा, अनुमति लेना, प्रशंसा करना, प्रार्थना आदि में प्रयोग होता है । 
जैसे :- आप जाओ - भवान् गच्छतु , 
वह खेले -सः क्रीडतु , 
तुम खाओ - त्वं खाद , 
क्या मैं बोलूँ -किम् अहं वदानि ?

  • (७) लङ् लकार 
= अनद्यतन भूत काल । आज का दिन छोड़ कर किसी अन्य दिन जो हुआ हो । 
जैसे :- 
आपने उस दिन भोजन पकाया था - भवान् तस्मिन् दिने भोजनं अपचत् ।

  • (८) लिङ् लकार 
= इसमें दो प्रकार के लकार होते हैं :--

   आशीर्लिङ् 
= किसी को आशिर्वाद देना हो ।
जैसे :- 
आप जीओ - भवान् जीवेत्।
तुम सुखी रहो - त्वं सुखी भव ।

   विधिलिङ् 
= किसी को विधी बतानी हो ।
जैसे :- 
आपको पढ़ना चाहिए - भवान् भठेत्।
मुझे जाना चाहिए - अहं गच्छेयम् ।

  • (९) लुङ् लकार
= सामान्य भूत काल । जो कभी भी बीत चुका हो । 
जैसे :- 
उसने खाना खाया - सः भोजनं अखादीत् ।

  • (१०) लृङ् लकार 
= ऐसा भूत काल जिसका प्रभाव वर्तमान तक हो । जब किसी क्रिया की असिद्धी हो गई हो ।
जैसे :- 
यदि वह पढ़ता तो विद्वान बनता । - 
यदि सः अपठिष्यत् तु विद्वान् अभविष्यत्।

इन्हीं लकारों में सभी धातुरूप चलते हैं ।

#10 sanskritlakar
#sanskritvyakaran 
#daslakar

जयतु संस्कृतम् ।। 
ASHISH JOSHI

नाम : संस्कृत ज्ञान समूह(Ashish joshi) स्थान: थरा , बनासकांठा ,गुजरात , भारत | कार्य : अध्ययन , अध्यापन/ यजन , याजन / आदान , प्रदानं । योग्यता : शास्त्री(.B.A) , शिक्षाशास्त्री(B.ED), आचार्य(M. A) , contact on whatsapp : 9662941910

Post a Comment

Previous Post Next Post